अरिहंत मेरे पिता हैं – बच्चों का भजन
कितनी सुन्दर है वो राहे जो मंदिर तक जाती है,
चलो उठो दौड़ कर आओ बच्चों, प्यारी पाठशाला बुलाती है
महा मन्त्र के मंगलाचार से परिचय मेरा कराती है
प्रतिदिन बारी बारी से वो महापुरुषो की गाथा गाती है
चलो दौड़ कर ………



